Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2004

माया · Illusion

जदि बिषै पियारी प्रीति सूं, तब अंतर हरि नांहि। जब अंतर हरि जी बसै, तब विषिया सूं चित्त नांहि।।