Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #202

गुरु · Guru

सतगुर हम सूं रीझि करि, एक कह्मा कर संग। बरस्या बादल प्रेम का, भींजि गया अब अंग।।