Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #205
भक्ति · Devotion
कबीरा प्रेम न चषिया, चषि न लिया साव। सूने घर का पांहुणां, ज्यूं आया त्यूं जाव।।
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