Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2055

माया · Illusion

कामीं अमीं न भावई, विषइ कौं ले सोधि। कुबधि न जाई जोव की, भावै स्‍वयं रहो प्रमोधि।।