Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
Kabir Amritwani
कबीर दोहा #2056
माया · Illusion
विषै विलंबी आत्मां, ताका मजकण खाया सोधि। ग्यांन अंकून न ऊगई, भावै निज प्रमोधि।।
कॉपी
शेयर
WhatsApp