Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #206
भक्ति · Devotion
कबीरा राम रिझाइ लै, मुखि अमृत गुण गाइ। फूटा नग ज्यूं जोड़ि मन, संधे संधि मिलाइ।।
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