Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #207

भक्ति · Devotion

बिरह-भुवगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ। राम-बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।।