Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #208
आत्मचिंतन · Self-reflection
जो रोऊँ तो बल घटै, हँसो तो राम रिसाइ। मन ही माहिं बिसूरणा, ज्यूँ घुँण काठहिं खाइ।।
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