Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2100

भक्ति · Devotion

धर सों शीश उतारिके, डारि देह ज्‍यों ढेल। कोई शूर को सोहसी, घर जाने का खेल।।