Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #2121
समय · Time
शूरा तौं सांच मतै, सहै जो सन्तुख धार। कायर अनी चुभाय के, पीछै झखै अपार।।
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