Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2128

अहंकार · Ego

लडने को सबही चला, शस्‍त्रह बांधि‍ अनेक। साहब आगै आपना, जूझैगा कोई एक।।