Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2131

वैराग्य · Detachment

तीर तुबक सों जो लडै, सो तो शूर न होय। माया तजि हरि को भजै, शूर कहावै सोय।।