Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #216

अहंकार · Ego

चतुराई सूवै पढ़ी, सोइ पंजर मांहि। फिरि प्रमोधै आन कौं, आपण समझे नाहिं।।