Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #2162
भक्ति · Devotion
राम रतन धन पाइकै, गांठ बांधि ना खोल। नहीं पटन नहिं पारखी, नहिं ग्राहक नहिं मोल।।
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