Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #217

अहंकार · Ego

कबीर मन फूल्या फिरै, करता हूँ मैं घ्रंम। कोटि क्रम सिरि ले चल्या, चेत न देखै भ्रम।।