Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2182

भक्ति · Devotion

तुम्‍हे बिसारे क्‍यों बनै, मैं किस शरने जाउं। शिव विरंचि मुनि नारदा, तिनके हृदय न समाउं।।