Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #220
माया · Illusion
त्रिक्षणा सींची ना बुझै, दिन दिन बधती जाइ। जवासा के रुष ज्यूं, घण मेहां कुमिलाइ।।
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