Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2210

आत्मचिंतन · Self-reflection

नगर चन तब जानिये, जब एकै राजा होय। याहि दुराजी राज में, सुखी न देखा कोय।।