Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2241

करुणा · Compassion

जीव हनै हिंसा करै, प्रगट पाप सिर होय। पाप सबै जो देखिया, पुन्‍य न देखा कोय।।