Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #2260

गुरु · Guru

कबीर गुर बसै बनारसी, सिष समंदां तीर। बिसारया नहीं बीसरै, जै गुंण होई सरीर।।