Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #2264
प्रेम · Love
आगि आंचि सहना सुगम, सुगम खड़क की धार। नेह निबाहन एक रस, महा कठिन ब्यौहार।।
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