Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
Kabir Amritwani
कबीर दोहा #2282
आत्मचिंतन · Self-reflection
दौड़त दौड़त दाडिया, जेती मन की दौर। दौड़ि थके मन थिर भया, वस्तु ठौर की ठौर।।
कॉपी
शेयर
WhatsApp