Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #244

आत्मचिंतन · Self-reflection

आसा का ईंधण करूँ, मनसा करूँ बिभूति। जोगी फेरी फिल करूँ, यौं बिनना वो सूति।।