Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #246

भक्ति · Devotion

घन गरजै दामिनि दमकै, बूँदैं बरसैं झर लाग गए। हर तलाब में कमल खिले, तहाँ भानु परगट भये।।