Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #250

आत्मचिंतन · Self-reflection

कबीर मारू मन कूँ, टूक-टूक है जाइ। विष की क्यारी बोइ करि, लुणत कहा पछिताइ।।