Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #253

आत्मचिंतन · Self-reflection

कहा कियौ हम आइ करि, कहा कहैंगे जाइ। इत के भये न उत के, चलित भूल गँवाइ।।