Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #258

भक्ति · Devotion

कबीर केवल राम की, तू जिनि छाँड़ै ओट। घण-अहरनि बिचि लौह ज्यूँ, घणी सहै सिर चोट।।