Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
आज का दोहा
प्रीमियम
लॉग इन / रजिस्टर
Kabir Amritwani
कबीर दोहा #265
वैराग्य · Detachment
स्वाँग पहरि सो रहा भया, खाया-पीया खूंदि। जिहि तेरी साधु नीकले, सो तो मेल्ही मूंदि।।
कॉपी
शेयर
WhatsApp