Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #266

भक्ति · Devotion

चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात। एक निस प्रेही निरधार का, गाहक गोपीनाथ।।