Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #270

भक्ति · Devotion

पावक रूपी राम है, घटि-घटि रह्या समाइ। चित चकमक लागै नहीं, ताथै घूवाँ है-है जाइ।।