Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #272
सत्य · Truth
जिहिं धरि साध न पूजि, हरि की सेवा नाहिं। ते घर भड़धट सारषे, भूत बसै तिन माहिं।।
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