Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #279

भक्ति · Devotion

सिर साटें हरि सेवेये, छांड़ि जीव की बाणि। जे सिर दीया हरि मिलै, तब लगि हाणि न जाणि।।