Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #281

भक्ति · Devotion

आपा भेटियाँ हरि मिलै, हरि मेट् या सब जाइ। अकथ कहाणी प्रेम की, कह्या न कोउ पत्याइ।।