Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #286
भक्ति · Devotion
कबीर हरि कग नाव, सूँ प्रीति रहै इकवार। तौ मुख तैं मोती झड़ै, हीरे अन्त न पार।।
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