Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #302

गुरु · Guru

कोटिन चन्दा उगही, सूरज कोटि हज़ार। तीमिर तौ नाशै नहीं, बिन गुरु घोर अंधार।।