Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #304

गुरु · Guru

तन मन शीष निछावरै, दीजै सरबस प्रान। कहैं कबीर गुरु प्रेम बिन, कितहूँ कुशल नहिं क्षेम।।