Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #305

गुरु · Guru

भौ सागर की त्रास तेक, गुरु की पकड़ो बाँहि। गुरु बिन कौन उबारसी, भौ जल धारा माँहि।।