Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #306

गुरु · Guru

करै दूरि अज्ञानता, अंजन ज्ञान सुदेय। बलिहारी वे गुरुन की, हंस उबारि जुलेय।।