Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #311

भक्ति · Devotion

सतगुरु मिला जु जानिये, ज्ञान उजाला होय। भ्रम का भांड तोड़ि करि, रहै निराला होय।।