Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #318

गुरु · Guru

करहु छोड़ कुल लाज, जो सतगुरु उपदेश है। होये सब जिव काज, निश्चय करि परतीत करू।।