Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #320

गुरु · Guru

जग सब सागर मोहिं, कहु कैसे बूड़त तेरे। गहु सतगुरु की बाहिं, जो जल थल रक्षा करै।।