Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #322
गुरु · Guru
कबीर गुरु है घाट का, हाँटू बैठा चेल। मूड़ मुड़ाया साँझ कूँ, गुरु सबेरे ठेल।।
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