Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #336

गुरु · Guru

कबीर गुरु की भक्ति बिन, नारी कूकरी होय। गली-गली भूँकत फिरै, टूक न डारै कोय।।