Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #342
सत्य · Truth
साकट कहा न कहि चलै, सुनहा कहा न खाय। जो कौवा मठ हगि भरै, तो मठ को कहा नशाय।।
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