Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #386

वैराग्य · Detachment

कबीर मेरा कोइ नहीं, हम काहू के नाहिं। पारै पहुँची नाव ज्यों, मिलि कै बिछुरी जाहिं।।