Kabir Amritwani
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #401
आत्मचिंतन · Self-reflection
शब्द विचारे पथ चलै, ज्ञान गली दे पाँव। क्या रमता क्या बैठता, क्या गृह कंदला छाँव।।
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