Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #403

गुरु · Guru

पाँच सात सुमता भरी, गुरु सेवा चित लाय। तब गुरु आज्ञा लेय के, रहे देशान्तर जाय।।