Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #414
गुरु · Guru
कबिरा संगति साधु की, जो करि जाने कोय। सकल बिरछ चन्दन भये, बांस न चन्दन होय।।
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