Kabir AmritwaniKabir Ke Dohe

Kabir Amritwani

कबीर दोहा #417

माया · Illusion

साध संग अन्तर पड़े, यह मति कबहु न होय। कहैं कबीर तिहु लोक में, सुखी न देखा कोय।।