Kabir Amritwani
Kabir Ke Dohe
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Kabir Amritwani
कबीर दोहा #425
गुरु · Guru
जीवन जीवन रात मद, अविचल रहै न कोय। जु दिन जाय सत्संग में, जीवन का फल सोय।।
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